आस्था एवं भक्ति का संगम: ‘कृष्णार्पणम्’

भारतीय विद्याभवन, विद्याश्रम, प्रतापनगर में जन्माष्टमी महोत्सव ‘कृष्णार्पणम्’ का आयोजन 8 अगस्त को जयपुर के प्रतिष्ठित महाराणा प्रताप सभागार में पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति के साथ किया गया। यह कार्यक्रम भगवान श्रीकृष्ण के धर्म संस्थापक एवं शांति दूत स्वरूप को समर्पित था।

कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति नाटक ‘शांतिदूत’ रही, जिसमें वर्तमान संदर्भ की चुनौतियों से संघर्ष, शांति और युद्ध की अनिवार्यता अथवा विराम पर गंभीर विचार प्रस्तुत किया गया। यह नाटक दर्शकों को सोचने के लिए प्रेरित करता है कि किस प्रकार न्याय एवं शांति की स्थापना हेतु अधर्म का नाश भी आवश्यक हो जाता है।

‘धर्म’ एवं ‘कर्म’ की स्थापना का संदेश देती सामूहिक गायन प्रस्तुति ने सभागार को तालियों से गूंजा दिया। बालवाड़ी के नन्हें बच्चों द्वारा प्रस्तुत नृत्य ‘आयो नटखट नंदलाला’ में श्रीकृष्ण के बालरूप को अत्यंत आकर्षक रूप में दर्शाया गया, जिसे दर्शकों ने भरपूर सराहा।

नृत्य-नाटिका के माध्यम से श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर कालिया मर्दन तक की लीला को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। ‘नरसी जी का मायरा’ एवं ‘सुदामा-कृष्ण मित्र प्रसंग’ पर आधारित झाँकियाँ आस्था एवं भक्तिभाव से ओतप्रोत रहीं, जिन्होंने पूरे सभागार को भक्ति-सागर में डुबो दिया।

इस भव्य आयोजन में विद्यालय प्रबंधन, समिति के सदस्यगण एवं अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 300 से अधिक छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अंत में स्तुति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ तथा सभी को प्रसाद वितरित किया गया।

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